राजस्थान (चूरू) : 15 वर्षीय किशोर से 10 लोगों ने किया कुकर्म

जागरूक टाइम्स 455 Dec 12, 2019

राजस्थान में चूरू जिले के राजलदेसर पुलिस थाने में 15 वर्षीय एक किशोर से 10 लोगों ने बारी-बारी से कुकर्म किया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस में दर्ज मामले के अनुसार, मंगलवार देर शाम एक किशोर अपने घर के खड़ा था। इसी दौरान एक बोलेरा गाड़ी आई और उसमें सवार कुछ लोगों ने उसे जबरन बिठा लिया। गाड़ी में सवार 10 लोग किशोर को पास के ही देसुसर गांव में स्थित शराब की दुकान पर ले गए और वहां पहले तो उसके साथ मारपीट की और फिर सभी ने बारी-बारी से कुकर्म किया।

आरोपित बुधवार अल सुबह किशोर को बेहोशी की हालत में घर के बाहर छोड़कर फरार हो गए। परिजनों ने बालक को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां होश में आने के बाद उसने पूरे घटनाक्रम की जानकरी दी। इस पर परिजनों ने गुरूवार सुबह पुलिस में मामला दर्ज कराया। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपितों की तलाश शुरू कर दी।

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के दोरासर स्थित सैनिक स्कूल में तैनात एक शिक्षक ने विगत छह माह के दौरान एक दर्जन बच्चों के साथ कुकर्म किया। कुकर्म करने के बाद शिक्षक उन्हें किसी को बताने पर जान से मारने या परीक्षा में फेल करने की बात कह कर धमकाता रहा। सभी पीड़ित बच्चे दस से बारह साल की उम्र के हैं। मामले का पर्दाफाश तब हुआ, जब एक पी़ड़ित बच्चे ने पिछले दिनों स्कूल की शिकायत पेटी में अपना शिकायती पत्र डाला। मामला स्कूल के प्रिंसिपल तक पहुंचा तो उन्होंने सात दिसंबर को शिक्षक रवींद्र सिंह के खिलाफ झुंझुनूं के सदर थाने में मामला दर्ज कराया।

प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने आरोपित शिक्षक रवींद्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ पॉक्सो में मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच कर रहे झुंझुंनू के पुलिस उप अधीक्षक ज्ञान सिंह चौधरी ने बताया कि आरोपित शिक्षक झुंझुनूं के ही जयपहाड़ी का रहने वाला है। उसका परिवार बीकानेर में रहता है। उसकी पत्नी भी शिक्षिका है। आरोपित शिक्षक वर्तमान में दोरासर गांव स्थित स्कूल कैंपस में ही रहता है और यहीं पर उसने इस वारदात को अंजाम दिया। अब तक की जांच में यह भी सामने आया है कि बच्चों ने पहले भी इस बाबत शिकायत पेटिका में पत्र डाला था। लेकिन शिक्षक ने उसे गायब कर दिया था। आरोपित शिक्षक को गुरवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा।

इस मामले में पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। मामला सात दिसंबर को दर्ज हो गया, लेकिन पुलिस ने आरोपित शिक्षक को 10 दिसंबर को गिरफ्तार किया। मामला सार्वजनिक होने पर हंगामा होने के भय से पुलिस ने इस प्रकरण को दबाए रखा। न तो स्कूल जाकर अन्य शिक्षकों से पूछताछ की और न ही पीड़ित बच्चों से बात की। बुधवार को स्कूल के ही शिक्षकों ने जब पूरे प्रकरण की जानकारी स्थानीय लोगों को दी तो मामला सार्वजनिक हुआ। इसके बाद स्कूल के हॉस्टल में रहने वाले बच्चों के स्वजन उनसे मिलने पहुंचे।

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