जालोर की अनदेखी करके, हार की खीज मिटा रही है सरकार - देवल

जागरूक टाइम्स 891 Feb 27, 2020

लगातार दूसरे बजट में की जालोर जिले की उपेक्षा

रानीवाड़ा। रानीवाड़ा विधायक नारायणसिंह देवल ने विधानसभा में बजट 2020 पर हो रही चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि हमने पिछली बार के बजट को चश्मा लगाकर खूब अच्छे से पढ़ा, लेकिन कहीं भी जालोर जिले का नाम तक नहीं मिला और इस बार के बजट में भी केवल सांचौर में एक ट्रोमा सेंटर खोलने की घोषणा करके मंत्रीजी को खुश करने का काम किया है। ये सरकार जालोर की जनता से विधानसभा और लोकसभा के चुनावों में कांग्रेस पार्टी को मिली करारी हार का बदला ले रही है।

देवल ने इस पर एक शेर भी पढ़ा कफस में रहके इंसाफ मांगने वालो, यही बहुत है कि फरियाद की इजाजत है मतलब जालोर जिले की जनता के प्रति राज्य सरकार इतनी निरंकुष हो चुकी है कि फरियाद करने की इजाजत दे रही है ये ही बहुत है। वरना जालोर की जनता को तो सरकार का बसे चले तो फरियाद भी नहीं करने दे। इसके बाद देवल ने एक और शेर सुनाया न तड़पने की इजाजत है, न फरियाद की है, घुटके मर जाऊं, ये मर्जी मेरे सय्याद की है मतलब कि जालोर की जनता ने दोनों चुनावों में कांग्रेस पार्टी के मुंह पर अपने वोट की ताकत से जो जोरदार तमाचा मारा है, इसके कारण पूरे पांच साल तक ये सरकार जालोर की जनता से ऐसा ही बर्ताव करेगी।

देवल ने कहा कि जालोर जिले की जीवनदायनी नर्मदा नहर है जिसके तीन प्रोजेक्ट डीआर प्रोजेक्ट, ई.आर. प्रोजेक्ट और एफ.आर. प्रोजेक्ट चल रहे हैं उनके लिए भी पिछले साल और इस साल के बजट में एक रूपया भी नहीं दिया है। मेरे रानीवाड़ा क्षेत्र के 138 गांव जुडऩे थे लेकिन बजट में पैसे नहीं देने के कारण अभी तक केवल 42 गांव ही जुड़ सके हैं और उनमें भी ढ़ाणियों तक तो पानी पहुंचा ही नहीं है। इसी प्रकार रानीवाड़ा कस्बे में एक रेलवे फाटक है जिस पर दिन भर में लगभग 35 से ज्यादा टेऊने निकलती हैं और ये फाटक लगभग बन्द सा ही रहता है।

फाटक के बन्द रहने से कई बार एम्बूलेन्स भी मरीज को समय से अस्पताल तक नहीं ले जा पाती है जिस कारण उस मरीज की मौत हो जाती है। इस फाटक का मैंने सर्वे करवा दिया है। करीब 50 करोड़ रूपये की लागत से इस पर आरओबी बनेगा। परन्तु सरकार ने इस बार पूरे प्रदेश में कोई भी आरओबी की घोषणा नहीं की है तो ये काम भी इस बार तो होने वाला नहीं है। देवल ने सीएजी की रिर्पोट का हवाला देते हुए कहा कि दिसम्बर, 2019 तक ये सरकार केवल 56-57 प्रतिशत राशि ही खर्च कर पाई है यानी मात्र आधी राशि की खर्च कर सकी है, तो अब बाकि तीन महिनों में कौनसा तीर मार लोगे। देवल ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि इस सरकार ने सब्सिडी देने में तो कमाल ही कर दिया।

सब्सिडी की कुल राशि में से दिसम्बर, 2019 तक इन्होंने केवल 25 प्रतिशत राशि ही खर्च की है। हमारी पिछली सरकार ने किसानों को बिजली बिल में जो 833 रूपये महिने की सब्सिडी देना शुरू किया था वो भी इन्होंने पिछले दो-तीन महिनों से बन्द कर दी है। अपने आप को किसानों की हितैषी बताने वाली कांग्रेस पार्टी की इस सरकार ने पिछले बजट में 1 हजार करोड़ की राशि से एक किसान कल्याण कोष का गठन करने की बात कही थी जिसका इन्होंने ही नाम बदलकर कृषक कल्याण कोष कर दिया। उसमें भी एक हजार करोड़ में से कृषि मंत्रीजी के जवाब के अनुसार 600 करोड़ तो ये केवल फसल बीमा के प्रीमीयम भरने में ही खर्च कर देगें तो फिर किसानों का कल्याण कैसे करेंगे। अल्पकालीन फसली ऋण में भी इन्होंने साख सीमा का रायडर लगा दिया, उसके बाद भी किसानों की जितनी साख सीमा तय की गई, उतनी राशि भी किसानों को किश्तों में दे रहे हैं। जो किसान के कोई काम की नहीं। प्रत्येक ग्राम सेवा सहकारी समिति पर गोदाम बनाने के लिए पिछले बजट में 700 गोदाम बनाने की बात कही थी, मुझे तो कहीं भी एक भी नया गोदाम बना हुआ नहीं दिखा। केवल थोथी घोषणाऐं करते हैं। इसी प्रकार किसानों का सम्पूर्ण फसली ऋण माफ करने की बात की थी और मुख्यमंत्री ने अपने जवाब में टोंक जिले के दो किसान लड्डूलाल और देवकरण के 5 लाख और 7 लाख तक के कर्जे माफ होने की बात कही, तो मुख्यमंत्री को बताना चाहता हूं कि रानीवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में अभी कुछ दिन पहले ही दईपुर गांव के किसान अगराराम पुत्र वजाराम कलबी एवं वीरमाराम पुत्र अगराराम कलबी की जमीनों की कुर्की के नीलामी आदेश जारी हो गये थे। गरीब किसानों ने कर्जा लेकर बैंक का पैसा चुकाया तब जाकर उनकी कुर्की रूकी और ये सरकार कर्जमाफी के नाम पर वाहवाही लूट रही है। अगर पूरे राजस्थान में ऐसे किसानों की जानकारी की जायेगी तो हजारों किसान ऐसे होंगे जिन पर आज भी बैंको का कर्जा चल रहा है। देवल ने कहा कि ये सरकार एक नया फण्डा लेकर आई है निरोगी राजस्थान। तो मैं ये कहना चाहता हूं कि मैंने इस बजट भाषण के पहले पेज को देखा तो राजस्थान के नक्शे में आपने कहीं भी निरोगी राजस्थान नहीं लिखा जबकि नक्शे के बाहर सब जगह पर निरोगी राजस्थान लिखा हुआ है। इसका मतलब ये हुआ कि राजस्थान के बाहर निरोगी बनाओगे, राजस्थान के अन्दर राजस्थान की जनता को निरोगी नहीं बनाओगे। इस सरकार ने दिसम्बर, 2019 तक केवल 4 उप स्वास्थ्य केन्द्रों को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में क्रमोन्नत किया है जबकि हमारी सरकार ने इतने ही समय में यानी दिसम्बर, 2014 तक 5 पीएचसी को सीएचसी बनाया था, 12 नये पीएचसी खोले थे और तीन नये उप स्वास्थ्य केन्द्र खोले थे। इसलिए सब जानते हैं कि काम कौनसी सरकार करती है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को उप स्वास्थ्य केन्द्रों से स्वास्थ्य लाभ मिलता है परन्तु आपने उसके बजट में भी 28 करोड़ रूपये की कमी करदी। मेरे विधानसभा क्षेत्र के जसवन्तपुरा की सीएचसी में डॉक्टरों से सारे पद खाली पड़े हैं, केवल एक डॉक्टर के भरोसे पूरी सीएचसी चल रही है और ये बात कर रहे हैं, निरोगी राजस्थान बनाने की। आपकी मंशा पूरी जनता इस बजट के माध्यम से जान रही है फिर भी मैं मेरे विधानसभा क्षेत्र की कुछ मांगे सरकार के समक्ष रखना चाहता हूं और चाहूंगा कि जब मुख्यमंत्री जी बजट भाषण पर अपना जवाब दें तो मेरी मांगों की भी घोषणा कर दें। देवल ने मांग की कि नर्मदा के तीनों प्रोजेक्टों को इसी बजट में पैसा दिया जाये। डीआर प्रोजेक्ट का काम जल्दी से जल्दी पूरा कराने के लिए तुरन्त पैसा जारी करे और कलस्टर के लिए 500 करोड़ रूपये की स्वीकृति जारी करें। नर्मदा के सरप्लस पानी को रानीवाड़ा क्षेत्र में सिंचाई के लिए दिये जाने की व्यवस्था की जाये। रानीवाड़ा कॉलेज की अलग से बिल्डिंग बनाने के लिए छ: करोड़ रूपये स्वीकृत करे जाये। जसवन्तपुरा आईटीआई कॉलेज को शुरू करावें। बडगांव में फल व सब्जी मण्डी खोली जाये। जलदाय विभाग के सहायक अभियंताओं और कनिष्ठ अभियंताओं के खाली पदों को शीघ्र भरा जाये।



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