सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या और रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाना जरूरी : जस्टिस गोगोई

जागरूक टाइम्स 717 Jun 22, 2019


-सीजेआई ने पीएम मोदी को लिखे तीन पत्रों में दिए सुझाव

नई दिल्ली (ईएमएस)। देश की अदालतों पर 43 लाख से अधिक मुकदमों के बढ़ते दवाब को रेखांकित करते हुए प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीन पत्र लिखे हैं। मुख्य न्यायाधीश ने अपनी चिट्ठियों में जजों की संख्या बढ़ाने के अलावा सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ दो संवैधानिक संशोधन करने का अनुरोध किया है। जस्टिस रंजन गोगोई ने अपने पत्रों में पीएम नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया है कि अगर पेंडेंसी खत्म करनी है तो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या में बढ़ोतरी करना जरूरी है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में 31 जज हैं, इनकी संख्या बढ़ाए बिना पेंडेंसी खत्म करना संभव नहीं है। कोर्ट में कुल 58669 मामले लंबित हैं। उन्होंने अपने पत्र में हाईकोर्ट के जजों के अवकाश की उम्र 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने का सुझाव दिया है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने पीएम मोदी को लिखे तीसरे पत्र में संविधान के अनुच्छेद 128 और 224ए के तहत सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के कार्यकाल की पुरानी परंपरा को पुनर्जीवित करने की मांग की है।

उन्होंने कहा ऐसा करने से सालों से लंबित मामलों का निपटारा किया जा सकेगा। उन्होंने बताया सुप्रीम कोर्ट में 26 केस 25 सालों से, 100 केस 20 सालों से, 593 केस 15 सालों से और 4977 केस पिछले 10 सालों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। इस लिए अविलंब सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान जजों की संख्या 31 से बढ़ा कर 37 कर दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा देश के 24 उच्च न्यायालयों में 43 लाख केस लंबित हैं। यह बेहद चिंताजनक है।



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